आज का पूरा दिन मैंने अमन को मल्टीमीडिया मोबाइल फ़ोन ऑपरेट करने के लिए सिखाने में लगाया . अमन को बहुत सी फंक्शनलिटी आ भी गई . आज अमन बहुत खुस है
Wednesday, January 23, 2013
Tuesday, July 10, 2012
Saturday, June 30, 2012
Monday, April 9, 2012
हमारा समाज किस तरफ ?
आज के दौर में हम और हमारा समाज किस तरफ हम सब को ले के जा रहा है , ये एक चिंता का विषय बन कर रह गया है .हर एक चीज की कीमत इस तरह से बढ़ चुकी है के हमारे और आप के पहुच के बहार होती जा रही है .
क्या वोह दिन अब आ गया है जब हंस चुगेगा दाना और कुआ मोती खायेगा ? जी हाँ ऐसा प्रतीत हो रहा हा आज के समाज को देख कर के जो व्यक्ति मेहनत काश है वोह तो हर तरह से परेशान है और जो लोग झूठे मक्कार और बेईम्मान है उनके पास अपार संपत्ति का ढेर होता जा रहा है ?
सवाल सबसे बड़ा यह है के आखिर कब तक .......? आज के दौर में भाई भाई का दुसमन है बाप को अपने बेटे पर भरोसा नहीं है ...और तो और बीवी को अपने सौहर पर और सौहर को अपनी बीवी पर से यकीं उठता जा रहा है ...
यह बहूत ही गंभीर सवाल बन चूका है के आज का समाज मानव जाती किस तरफ कदम बाधा रहा है...
हर तरफ असान्ति ही असान्ति है ...आज पूरा विश्व के सामने ऐसे बहुत से सवाल मुह बाये खड़ा है ....और इस का जवाब धुंध रहा है पैर जवाब नहीं मिल पा रहा है ..................
क्या वोह दिन अब आ गया है जब हंस चुगेगा दाना और कुआ मोती खायेगा ? जी हाँ ऐसा प्रतीत हो रहा हा आज के समाज को देख कर के जो व्यक्ति मेहनत काश है वोह तो हर तरह से परेशान है और जो लोग झूठे मक्कार और बेईम्मान है उनके पास अपार संपत्ति का ढेर होता जा रहा है ?
सवाल सबसे बड़ा यह है के आखिर कब तक .......? आज के दौर में भाई भाई का दुसमन है बाप को अपने बेटे पर भरोसा नहीं है ...और तो और बीवी को अपने सौहर पर और सौहर को अपनी बीवी पर से यकीं उठता जा रहा है ...
यह बहूत ही गंभीर सवाल बन चूका है के आज का समाज मानव जाती किस तरफ कदम बाधा रहा है...
हर तरफ असान्ति ही असान्ति है ...आज पूरा विश्व के सामने ऐसे बहुत से सवाल मुह बाये खड़ा है ....और इस का जवाब धुंध रहा है पैर जवाब नहीं मिल पा रहा है ..................
Saturday, March 24, 2012
kabhi na kabhi
aam taur pe aadmin is kash makash ki jindagi me apni safalta ke liye har dam prayaash to karta hi hai
isi ummeed pe ke sayed aaj nahi to kal sahi kabhi na kabhi to safalta milegi hi , aur wahi main bhi kar raha hoon.
dekhe kab aur kitne samay ke baad safalta haath lagati hai
isi ummeed pe ke sayed aaj nahi to kal sahi kabhi na kabhi to safalta milegi hi , aur wahi main bhi kar raha hoon.
dekhe kab aur kitne samay ke baad safalta haath lagati hai
Monday, January 9, 2012
कैसे कैसे लोग
धरती पे वैसे तो हर तरह के लोग है ...लेकिन कुछ लोग सिर्फ अपने लिए जीते है और दुसरे को तुच्छ समझते है ...लेकिन साथ ही वे इस कडुए सच को नजरअंदाज करदेते है के अपने लिए अगर कोई जीता है तो वो कुत्ता ज्यादा इंसान कम होता है ...कों की इंसान तो वो है जिसको इस्वर ने सोचने समझने की सकती ज्यादा दी है ...अगर कोई इंसान भी जानवरों की तरह व्यवहार करने लगे तो समझो उसके अन्दर जानवरों के गुण आगये है आदमी के नहीं ... और धीर धीरे वह स्वार्थ ही में इस तरह से डूब जाता हा के एक दिन वह इंसान से जानवर बन जाता है ...लेकिन जब तक वोह होश में आता है तबतक तो बहूत देर हो चुकी होती है ....इसलिए दूसरों के लिए भी जी कर देखो भी असली जिंदगी का मजा मिलेगा और तभी जिंदगी जीने लायेक बन जाती है ....
आपसब को नए साल की बहुत बहुत सुभकामनाये ........
रियाज़ बघकोली
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