Friday, May 17, 2013

मेरी बड़ी  बहन इतनी मतलब परस्त होगी मैंने तो कभी सोंचा भी न था ...
अम्मी के चहारम के ठीक कल होकर , घर की जमीन की बटवारे के लिए गाँव के पंचो को जमा कर लिया ....और गलत तरीके से बटवारा करवा दिया ...इस कामको अंजाम देने में ग्यास भैया ने बड़ी बहन का साथ दिया ....बटवारे के मुताबिक बड़ी बहन ने अपने हिस्से की जमीन छोटी बहन ( स्वर्गीय हलीमा ) की बेटी लाडली को देने का वायदा  किया , जिसका जिक्र पंचनामा में है ....
लेकिन बटवारा हो जाने के बाद लाडली ( विकलांग ) को उसका हिस्सा देना तो दूर और उसके हिस्से की जमीन को अपने कब्जे में कर रखा है .....

एक दो बार लाडली अपने सौहर को लेकर बघाकोल आई 
और अपने हिस्से की जमीन वापिस मांगनी चाही , लेकिन उसकी 
एक न सुनी गयी कयोंकि ग्यास भाई और हमीदा बाजी दोनों की आपस में मिली भगत थी .....
13 साल से उस जमीन में गलत तरीके से हमीदा बाजी ( एक मतलब परस्त और लालची औरत )
कब्ज़ा जमाये बैठी है ....
मैंने सोचा के चलो जो होना था वो हो गया , मेरी आँखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे .....जैसे तैसे रात गुजरी और सुबह हो गई ...सो मैंने कुरानखानी के लिए जरुरत की चीजों की खरीदारी सुरु कर दी और ग्यास भैया को बताया ....तो बोल पड़े की अगर मैंने सामान मिलाया कुरानखानी के लिए तो हमीदा बाजी शामिल नहीं होगी ....मजबूरन हम दोनों भाइयों
को अलग अलग अम्मी के चहारम के मौके पर कुरानखानी करनी पड़ी ......

Saturday, May 11, 2013

1989 से लेकर 2013  तक की जिंदगी में बहुत सारा उतार चढ़ाव देखने को मिला
सन  2000 इ,सवी में अम्मी का इन्तेकाल हो गया ... इस बात की खबर तो मुझे मिली लेकिन 
मेरी बड़ी बहन के जरिये नहीं किसी और ने मुझे इस बात की जानकारी दी ...कयोंकि बड़ी बहन और मंझिले भाई  ( ग्यास) की नजर मेरे हिस्से की जमीन और माँ , बाप की बनायी हुई संपत्ति पर थी ...माँ मरने से 
पहले मुझे बहुत याद करती थी , उन दिनों मैं दिल्ली में ही था ...अम्मी ने मुझसे बार बार मिलने के लिए बड़ी बहन को कहा की जरा रेयाज़ को दिल्ली से बुला दो ...पर बड़ी बहन ने माँ की एक न सुनी और अम्मी के मरने के बाद जो भी पैसे और गहने अम्मी के पास थे वो सब बड़ी बहन ने ले लिए .....खैर किसी तरह से अम्मी के इन्तेकाल के बाद मै घर पहुंचा तो बड़ी बहन मुझे देखकर हैरान -परेशान हो गई कयोंकि उसके मन में खोट था ....ये बात इस बात की तरफ इशारा करता है अम्मी को 
जान बूझ कर सेवा नहीं किया गया और न हमें बुलाया गया ...जिसकी वजह से अम्मी को मुझसे मिले बगैर इस दुनिया से 
रुखसत होना पड़ा ......गौरतलब है इस काम में मंझिले भाई बड़ी बहन के  साथ बराबर के भागिदार है ..

Tuesday, April 30, 2013


Wedding Flowers Gallery

रहने लगे हम आजकल बनकर अजनबी की तरहा
जैसे  के कभी मिले ही न हो आसमां और जमीं की  तरहा 


Lily Flowers Gallery

जिंदगी ने नहीं अपनों ने सताया है
खुदा ने नहीं अपनों ने रुलाया है 

तुम सताओगे तो नई बात न होगी 
जाने रब ने मुझे तुम से क्यों मिलाया है 

Monday, April 29, 2013


Silk Flowers Gallery


गर जुबां से बात न कर सको दिल को दिल से बात करने दो
अपने दिल में जगह देकर मुझे जीने की राह दिखा दो 

Monday, April 22, 2013


Orchid Flowers Gallery


चाहे ग़म लिखूं या ख़ुशी ये कलम अब न रुकेगा
मौत जब मुझको बुला लेगी , दुनियाँ याद करेगी

तेरे सजदे के सिवा ये सर कहीं न झुकेगा
मेरे पीछे जमाने की निगाहें राह तकेंगी