कल मेरी तबियत कुछ नासाज थी ..अतः मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली ...लेकिन १० बजे के आस पास तबियत ठीक हो गयी ...मेरा मन घर में नहीं लग रहा था ...सो मैंने एक इंग्लिश लंगुएज ट्रेनर की पोस्ट के लिए साक्छात्कार के लिए तयार हो गया ...लेकिन वो साक्छात्कार कुरुक्छेत्र में होना था ....मुझे इस बात का अंदाजा तो था के ये ही कोई मेरे घर से ज्यदाह से ज्यदाह ३ घंटे का रास्ता होगा ...परन्तु जब मैं घर से १० बजे चला तो ...बदरपुर से मेट्रो लिया और ISBT नयी दिल्ली पहुँचने में ही १२ बज चुके थे ....फिर ऊपर से कुरुक्छेत्र के लिए कोई बस सीधी नहीं मिल रही थी ....और इस तरह से १२ :३० हो चुके थे ...इसी बिच मेरे दिमाग में आया के अगर मैं ४-५ बजे शाम तक कुरुक्छेत्र पहुच भी जाता हूँ तो साक्छात्कार पूरी करते करते ६ तो बज ही जायेगा ...और फिर वापसी में मुझे बहुत परेशानी हो जाएगी ...इसलिए मैंने अपने consultant वीणा को फ़ोन करके इस सम्बन्ध में सूचित कर दिया ....और मैं फिर अपने घर वापिस हो गया ....खैर इस बात का अंदाजा तो लग ही गया है मुझे के हरियाणा के एक छोर से दुसरे छोर तक अगर सफ़र करना है तो एक दिन पूरा भी लगाया जाए तो सफ़िसिएन्ट नहीं है ......और ख़ास कर साक्छात्कार के मामले में तो बिलकुल नहीं ...अतः मैंने telephonic round के लिए अनुरोध तो किया है ...अगर कॉल आ गयी तो ठीक है नहीं तो दिल्ली एन सी आर ही में अच्छा रहेगा स्विच ओवर करना ......और इसी फैसले के साथ आज अपने ऑफिस को आ गया ....
Tuesday, February 8, 2011
कल मेरी तबियत कुछ नासाज थी ..अतः मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली ...लेकिन १० बजे के आस पास तबियत ठीक हो गयी ...मेरा मन घर में नहीं लग रहा था ...सो मैंने एक इंग्लिश लंगुएज ट्रेनर की पोस्ट के लिए साक्छात्कार के लिए तयार हो गया ...लेकिन वो साक्छात्कार कुरुक्छेत्र में होना था ....मुझे इस बात का अंदाजा तो था के ये ही कोई मेरे घर से ज्यदाह से ज्यदाह ३ घंटे का रास्ता होगा ...परन्तु जब मैं घर से १० बजे चला तो ...बदरपुर से मेट्रो लिया और ISBT नयी दिल्ली पहुँचने में ही १२ बज चुके थे ....फिर ऊपर से कुरुक्छेत्र के लिए कोई बस सीधी नहीं मिल रही थी ....और इस तरह से १२ :३० हो चुके थे ...इसी बिच मेरे दिमाग में आया के अगर मैं ४-५ बजे शाम तक कुरुक्छेत्र पहुच भी जाता हूँ तो साक्छात्कार पूरी करते करते ६ तो बज ही जायेगा ...और फिर वापसी में मुझे बहुत परेशानी हो जाएगी ...इसलिए मैंने अपने consultant वीणा को फ़ोन करके इस सम्बन्ध में सूचित कर दिया ....और मैं फिर अपने घर वापिस हो गया ....खैर इस बात का अंदाजा तो लग ही गया है मुझे के हरियाणा के एक छोर से दुसरे छोर तक अगर सफ़र करना है तो एक दिन पूरा भी लगाया जाए तो सफ़िसिएन्ट नहीं है ......और ख़ास कर साक्छात्कार के मामले में तो बिलकुल नहीं ...अतः मैंने telephonic round के लिए अनुरोध तो किया है ...अगर कॉल आ गयी तो ठीक है नहीं तो दिल्ली एन सी आर ही में अच्छा रहेगा स्विच ओवर करना ......और इसी फैसले के साथ आज अपने ऑफिस को आ गया ....
Wednesday, February 2, 2011
चलो अच्छा है अब सर्दी हमें अलविदा करने को तत्पर है इस वादे के साथ की फिर मिलेंगे अगले साल ....आज यह जान कर खुसी हुई के मगही भाषा के उत्थान के लिए भी कुछ लोग अपना योगदान दे रहे है ...और देना भी चाहिए .....वैसे ब्लू लाइन बसों के बंद होने के बाद थोड़ी कठिनाई तो जरूर हो रही है आने जाने में ...क्यों की अभी दिल्ली में डी.टी .सी बसों का अंदरवाले इलाके में आना जाना बहुत कम है ...जैसे - जैतपुर -मीठापुर वाले रूट को ही ले लीजिये .....ऊपर से बदरपुर में फ्लाईओवर बनजाने के बाद भी भयंकर जाम का लग जाना ........देखिये इस नयी मुसीबत से कब दिल्ली वाले उबर पाते है ....सबसे ज्यादा इससे प्रभावित अगर कोई हो रहा है तो आम आदमी ...ऐसा लगता है आम आदमी के बारे में सोंचने वाला इस दौर में बहूत कम लोग बचे है यानी न के बराबर ...अल्लाह जाने इस देश में आगे आम आदमी का क्या होने वाला है ...फिर भी उम्मीद का दामन थाम रखा है हमसब ने ......
Monday, January 24, 2011
जाती हुई ठण्ड ने अपना रंग दिखा ही दिया घर में किसी को जुकाम तो किसी को बुखार तो जैसे आम बात हो गई है ....कल रात को जैसे ही घर पंहुचा तो अरमान को अपने माँ की गोद में देखकर ही माथा ठनक गया ... पुचने पर पता चला के उसको तो बुखार और सर्दी ने जकड लिया है .... खाना खाने के बाद फर्स्ट ऐड की बॉक्स से बुखार की गोली और कुछ दवाईयां मैंने अरमान को खिलाई ... रात को उठकर मैंने चेक किया तो बुखार चला गया था ... लेकिन सुबह फिर बुखार आ गया ... खैर रोशन को ये हिदायत देकर के अगर बुखार फिर बढ़ जाए तो डॉक्टर के पास ले जाना और मैं ऑफिस को आ गया ... कुछ लेट हो चूका हूँ आज मैं ... जाम सड़क पे बहुत हो जाता है आजकल ....
Tuesday, January 11, 2011
चलो अच्छा है ठण्ड का मिजाज कुछ नरम हो गया है ... आज कुछ ठण्ड कम है ....सुबह ही सुबह इस बात का एहसास हो गया था ... जैसे ही कैब वाले का इन्तेजार कर रहा था के सामने से वो आता हुआ दिखाई दिया और मैं बिलकुल समय से पहले ही ऑफिस पहुच चूका हूँ .... वैसे आज बुधवार का दिन है ....और ऑफिस में ढेर सारा काम भी करना है ... वैसे ऑफिस में जल्दी पहुंचना ही सेफ रहता है ... क्योंकि देर से पहुँचने पर सारा काम देर से सुरु होता है ... और ऊपर से बॉस की फटकार सुनाने का खतरा भी बना ही रहता है ... इसलिए मेरी कोशिश हमेशा टाइम से पहले ही पहुँचने की रहती है .... और देखो न ... वैसे आज मेरे बेटे ने कुछ चीजो की फरमाईस नहीं की जाने क्यों ऐसा लगता है के वो मुझ से नाराज है क्यों की सरताज को मैंने आज सुबह सुबह ही मम्मी का कहा न मानने की वजह से, उसके गाल में एक हलकी सी चपत जो लगा दी थी ... जाने फिर उसने नास्ता किया के नहीं ... सायद इसीलिए आज वह मुझसे नाराज है ... पर कोई बात नहीं उसे मनाना भी मुझे आता है और शाम को उसे मैं जरूर मना लूँगा ...
Thursday, December 30, 2010
ये साल २०१० भी बहुत ही जल्द बीत गया ...लेकिन ये साल बहुत सी यादें ऐसी दे गया जो मेरी जिंदगी में पहले कभी नहीं हुआ.. मसलन कुछ ख़ास लोग पराये और कुछ पराये लोग अपने हुए ...खैर जिंदगी की येही सच्चाई है के जो लोग समय पे काम आ जाए वो ही अपने... और जो लोग समय पे जानबूझ कर काम न आ सके वो अपने होकर भी पराये से कम नहीं होते ...खैर चलिए हम नए साल का गर्म जोशी के साथ स्वागत करें ...ये जो आनेवाला नया साल २०११ है सायद् हमारी जिंदगी में कुछ नयापन लाये ..इसी उम्मीद के साथ हम अपने तमाम पाठको को नए साल का तहे दिल से मुबारक बाद देते है ....
Wednesday, December 29, 2010

मेरी माताजी के देहांत के कुछ ही महीनो के बाद मेरे बड़े बेटे का जन्म हुआ ...उस समय मेरी श्रीमतीजी मेरे पैत्रिक स्थान बघाकोल में ही थी ..और मैं Technocom दिल्ली में ...लेकिन मुझे फ़ोन के द्वारा यह सुभ समाचार मिल गया ...सुनकर अति प्रसंता हुई मैं अपने बेटे को देखने के लिए लालायीत हो गया ...वो साल सन २००० इश्वी का और फरवरी का महिना था ...दो तिन महीने बाद छुट्टी लेकर फिर एक बार घर जाने का मौका मिला ..अपने परिवार के साथ कुछ दिन बिताने के बाद पुनः हम सब दिल्ली आ गए ...फिर अपने बड़े बेटे के साथ ख्वाजा जी के दर पे हाजिरी दी उस समय मेरा बेटा अजाज़ (अमन ) येही कोई पांच साल का रहा होगा ...फिर Technocom के अपने साथियों के साथ आगरा तो कभी शिमला तो कभी नैनीताल भी घुमने का मौका मिला .... क्योंकि की हमलोग हर साल कहीं न कहीं घुमने जाते थे .....उन दिनों घुमने का आनंद भी बहुत आता था ....फिर कुछ साल बीत जाने के बाद अपनी सरीके हयात और अपने छोटे बेटे निजाम के साथ भी अजमेर शरीफ जाने का मौका मिला और ख्वाजा जी के दर पे हाजिरी दी...वाकई बहुत अच्चा लगा और वैसे भी वो उर्स का वक़्त था ....और फिर कुछ समय के बाद मैंने Technocom को किसी वजह से अलविदा कह दिया और मैं BPO सेक्टर में आ गया ....३-४ साल का वक्त किस तरह से निकल गया इसका तो पता भी न चला ....लेकिन हाँ कुछ खट्टी तो कुछ मीठी यादें जरूर मेरी जिंदगी के साथ जुड़ गयी...जो अच्छी बात रही वो यह की अनुभव बहुत मिला लेकिन जो बुरी बात रही वो यह की इस काम की वजह से मेरी दोनों कानो को काफी नुक्सान पहुंचा ....और इसी बुरे प्रभाव की वजह से मुझे BPO सेक्टर को अलविदा कह देना पड़ा ...और मार्च २०१० में मैंने एक GCC Approved कंपनी को ज्वाइन कर लिया ...मेरे तीनो ही बेटे बड़े ही चंचल है जिनके साथ घर में या बाहर जब घुमने जाते है तो खूब आनंद आता है और हस्ते बोलते हुए समय का पता ही नहीं चल पता के कब वक़्त बीत गया......... .....
Monday, December 27, 2010
और इस प्रकार कई मार्केटिंग कंपनियों में कार्य किया, कुछ साल और बीत गए इन्ही दिनों ( 1996 इश्वी में ) मेरी Marriage हो गयी .... फिर इसके बाद लास्ट मार्केटिंग की कंपनी जिसका नाम Waves Marketing tha .. जिसने अब अपना प्रोफाइल बदल लिया ,और साथ ही अपने कंपनी का नाम भी बदल कर Technocom रख लिया ...वहां पर कार्य करता रहा.....वो साल १९९९ का था जब मैंने एक छोटा सा घर हरियाणा में जैतपुर न्यू दिल्ली, के पास में बनाया ही था ...और रह रहा था ...की मेरी मदर का देहांत हो गया...और इस तरह से मेरी जिंदगी में जैसे गमो का पहार सा टूट पड़ा हो ....मैं मदर की मिटटी में सरिक होने के लिए घर गया ...और फिर उनका चहारम करने के बाद पुनः दिल्ली वापिस हो गया....
Subscribe to:
Posts (Atom)




